ग्रीन कॉफी हाल के वर्षों में वजन घटाने के लिए एक लोकप्रिय उपाय के रूप में उभरा है। ग्रीन कॉफी बीन्स असल में कच्चे, बिना रोस्ट किए हुए कॉफी बीन्स होते हैं, जिनमें उच्च मात्रा में क्लोरोजेनिक एसिड (CGA) पाया जाता है। यह वही तत्व है जो ग्रीन कॉफी को वेट-लॉस व वेट-मैनेजमेंट के मामले में इतना चमत्कारी बनाता है।
आइए इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानते हैं इस चमत्कारी क्लोरोजेनिक एसिड (CGA) के बारे में। जानेंगे कि ग्रीन कॉफी वजन घटाने में कैसे मददगार होता है, क्या हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक तथ्य, क्या हैं ग्रीन कॉफी के अन्य फ़ायदे और क्या है इसे लेने का सबसे आसान तरीक़ा।
क्या है ये ग्रीन कॉफी?
कॉफ़ी से तो सभी परिचित हैं लेकिन ग्रीन कॉफी के बारे में बहुत काम लोग जानते हैं और इसके हेल्थ बेनेफ़िट्स के बारे में तो काफ़ी काम लोग ही जानते हैं।
ग्रीन कॉफी की शुरुआत कॉफी के इतिहास से ही जुड़ी है। सबसे पहले इसका उपयोग 15वीं शताब्दी में अरब देशों में हुआ था, जहां लोग कच्चे कॉफी बीन्स को उबालकर उसका सेवन करते थे। बाद में कॉफी बीन्स को रोस्ट करने या भूनने का चलन शुरू हुआ और लोग रोस्टेड कॉफ़ी की ख़ुशबू और स्वाद के दीवाने होते चले गए। इससे ग्रीन कॉफी का उपयोग कम हो गया।
लेकिन हाल के वर्षों में, ग्रीन कॉफी को वेट-लॉस, वेट मैनेजमेंट और कई अन्य हेल्थ बेनेफ़िट्स के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा और इसके चमत्कारी नतीजों के कारण अब तो इसकी लोकप्रियता आकाश चुने लगी है। रीसर्च और वैज्ञानिक शोधों ने इसपर मुहर लगाई और इसलिए अब यह न्युट्रीशनिस्ट व वेट-लॉस एक्सपर्ट्स की पसंद बन चुका है। इसकी उच्च एंटीऑक्सीडेंट और क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा ने इसे हेल्थ व वेलनेस में एक नया स्थान दिलाया, खासकर नैचुरल हीलिंग और डिटॉक्सिफिकेशन में।

ग्रीन कॉफी को उसके कच्चे रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कैफीन की मात्रा कम होती है और इसके अन्य बायोएक्टिव तत्व अधिक होते हैं। ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाले मुख्य घटकों में कैफीन और क्लोरोजेनिक एसिड शामिल होते हैं। इसके अलावा इसमें कैफीन, थियामिन (विटामिन बी1), राइबोफ्लेविन (विटामिन बी2) और नियासिन (विटामिन बी3) जैसे विटामिन्स होते हैं। साथ ही इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनेरल्स होते हैं, जो शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रीन कॉफी में डाइटरी फाइबर होता है जो संतृप्ति (satiety) का अहसास दिलाता है। और साथ ही ग्रीन कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट्स व फ्लेवोनॉयड्स भी होते हैं।
ये सभी पोषक तत्व मिलकर ग्रीन कॉफी को एक संपूर्ण और स्वास्थ्यवर्धक हर्ब बनाते हैं।
जहां कैफीन को चयापचय (मेटाबोलिज्म) को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, वहीं क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में फ़ैट को कम करने में सहायक माना जाता है।
क्या है क्लोरोजेनिक एसिड का वर्किंग मैकेनिज़्म?
क्लोरोजेनिक एसिड का मैकेनिज़्म बड़ा दिलचस्प है! ये हमारे शरीर में सुपर-हीरो की तरह काम करता है। जब हम ग्रीन कॉफी लेते हैं, तो इसमें मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड सबसे पहले ग्लूकोज (चीनी) के अवशोषण को धीमा करता है। मतलब, ब्लड शुगर इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ता, जिससे इंसुलिन भी कंट्रोल में रहता है।
साथ ही, ये हमारे लीवर को भी कहता है, “चलो भाई, फैट कम करो” और वसा (फैट) के मेटाबॉलिज्म को बढ़ा देता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़कर शरीर की रक्षा करते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो, ये एसिड हमारे शरीर को फिट रखने में पीछे नहीं हटता।
क्यों है क्लोरोजेनिक एसिड वेट-मैनेजमेंट में इतना प्रभावी?
क्लोरोजेनिक एसिड ग्रीन कॉफी का मुख्य घटक है जो वजन घटाने में सहायता करता है। यह एक प्रकार का पॉलीफेनोल है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। यह एसिड ग्लूकोज के अवशोषण को नियंत्रित करता है और बॉडी में फ़ैट-डिपॉज़िट को कम करता है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:
ग्लूकोज का अवशोषण कम करना : क्लोरोजेनिक एसिड शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण को नियंत्रित करता है। जब कम मात्रा में ग्लूकोज शरीर में पहुंचता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को जलाने लगता है। यह प्रक्रिया वजन घटाने में सहायक हो सकती है।
वसा चयापचय में सुधार : क्लोरोजेनिक एसिड लीवर में वसा चयापचय (फैट मेटाबोलिज्म) को बढ़ाता है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
एंटीऑक्सीडेंट गुण : क्लोरोजेनिक एसिड के एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। इससे मेटाबोलिक प्रक्रियाएं सही तरीके से काम करती हैं, जो वजन घटाने में मदद करती हैं।

ग्रीन-कॉफी का कैफीन, कैसे है – वेट-लॉस में प्रभावी?
ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन एक उत्तेजक पदार्थ है जो मस्तिष्क को जागृत करता है और ऊर्जा स्तर को बढ़ाता है। इसका प्रभाव चयापचय दर को बढ़ाने में देखा गया है। जब चयापचय दर बढ़ती है, तो शरीर अधिक कैलोरी जलाने लगता है। कैफीन का एक अन्य प्रभाव यह है कि यह भूख को कम कर सकता है, जिससे कम कैलोरी का सेवन होता है। वजन घटाने में इसका कैफीन दो तरीक़े से काम करता है :
1. मेटाबोलिज़्म के दर को बढ़ाना : कैफीन का सेवन चयापचय दर को 3-11% तक बढ़ा सकता है, जिससे अधिक कैलोरी जलाने में मदद मिलती है।
2. थर्मोजेनेसिस में वृद्धि : कैफीन शरीर में थर्मोजेनेसिस (शरीर द्वारा गर्मी उत्पादन) को बढ़ावा देता है, जिससे ऊर्जा खर्च में वृद्धि होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
कैसे काम करता है ग्रीन कॉफी?
1. लो कैलोरी इंटेक: ग्रीन कॉफी भूख को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे लोग कम कैलोरी का सेवन करते हैं।
2. फ़ैट की कमी: यह फ़ैट के अवशोषण को कम करने और जमा फ़ैट को बर्न करने में सहायता करता है, जिससे शरीर में फ़ैट-डिपॉज़िट कम होता है।
3. ब्लड-शुगर के स्तर को नियंत्रित करना: ग्रीन कॉफी शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो वजन को स्थिर रखने में सहायक हो सकता है।
4. एनर्जी बूस्ट: इसमें मौजूद कैफीन आपको ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे आप दिनभर अधिक सक्रिय रह सकते हैं और परिणामस्वरूप आप अधिक कैलोरी बर्न करेंगे।
इस प्रकार वजन घटाने वालों के लिए ग्रीन कॉफी किसी वरदान से कम नहीं. ग्रीन कॉफी शरीर की चर्बी को मक्खन की तरह पिघला देती है। लेकिन वेट-लॉस और वेट मैनेजमेंट के अलावा भी ग्रीन कॉफी में ढ़ेर सारे हेल्थ बेनेफ़िट्स होते हैं। उनमें से 5 मुख्य बेनेफ़िट्स निम्न लिखित हैं:
ब्लड प्रेशर का नियंत्रण :
ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है। यह एसिड धमनियों की दीवारों को लचीला बनाए रखता है, जिससे रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इसके अलावा, ग्रीन कॉफी के एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव-स्ट्रेस को कम करते हैं, जो उच्च रक्तचाप के जोखिम को घटा सकते हैं। हालांकि, कैफीन की मात्रा के कारण कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ भी सकता है, इसलिए इसका सीमित मात्रा में सेवन जरूरी है।
एंटी-एजिंग में लाभकारी:
ग्रीन कॉफी में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, विशेषकर क्लोरोजेनिक एसिड, जो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। ये फ्री रेडिकल्स त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। ग्रीन कॉफी के एंटीऑक्सीडेंट गुण कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं, सूजन को कम करते हैं, और त्वचा की इलास्टिसिटी (लचक) बनाए रखते हैं। इसके नियमित सेवन से त्वचा कोमल और जवां दिखती है, झुर्रियों और फाइन लाइंस की संभावना कम हो जाती है। इस प्रकार, ग्रीन कॉफी के एंटी-एजिंग गुण उम्र बढ़ने के लक्षणों को धीमा करने में मदद करते हैं।
कैंसर से बचाव :
ग्रीन कॉफी में मौजूद वही क्लोरोजेनिक एसिड और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे बॉडी में फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे डीएनए को क्षति से बचाते हैं और कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव-स्ट्रेस को कम करते हैं, जो कैंसर के विकास को रोकने में सहायक होते हैं। इसके अलावा, ग्रीन कॉफी इंफ़्लेमेशन को भी कम करती है, जो कैंसर रिस्क के प्रमुख कारकों में से एक है।
मूड बूस्ट करने में सहायक :
ग्रीन कॉफी में कैफीन की उचित मात्रा होती है, जो मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स, जैसे डोपामिन और सेरोटोनिन, के स्तर को बढ़ाकर मूड को सुधारने में मदद करती है। ये न्यूरोट्रांसमीटर्स सकारात्मक भावनाओं और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देते हैं, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त और खुश महसूस करता है। कैफीन थकान को कम करता है और सतर्कता बढ़ाता है, जिससे मानसिक ऊर्जा में सुधार होता है और परिणाम स्वरूप मूड बेहतर होता है।
बॉडी डिटॉक्सिफायर :
ग्रीन कॉफी एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में कार्य करती है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से क्लोरोजेनिक एसिड की भरपूर मात्रा होती है। यह कम्पाउंड शरीर से विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है और लीवर को डिटॉक्सिफाई करता है। ग्रीन कॉफी लीवर के कार्यों में सुधार करती है, जिससे शरीर में जमा हानिकारक तत्व आसानी से निकल जाते हैं। इसके अलावा, यह मेटाबोलिज्म को बढ़ाकर और पाचन को बेहतर बनाकर शरीर को साफ और स्वस्थ रखती है। ग्रीन कॉफी शरीर के अंदरूनी सिस्टम को शुद्ध करके संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाती है।
क्या है ग्रीन कॉफी को लेने का सही तरीक़ा?
ग्रीन कॉफी की प्रतिदिन लिए जाने वाली मात्रा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिक मात्रा में ग्रीन कॉफी लेने से कैफीन से संबंधित दुष्प्रभाव हो सकते हैं। और इसीलिए विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि ग्रीन कॉफी का अधिकतम लाभ पाने के लिए इसे सही मात्रा में और सही समय पर लेना जरूरी है।
और यदि इन दोनों बातों (सही मात्रा और समय) का ख़्याल रखना चाहते हैं तो आपको ग्रीन कॉफी का प्योर सप्पलेमेंट लेना चाहिए। और ऐसा ही एक बेहतरीन सप्पलेमेंट है – गोयंग का ग्रीन कॉफी कैपस्युल जिसमें है ग्रीन कॉफी का क्लीन व प्योर एक्सट्रैक्ट। यह 500mg कैपस्युल के फ़ॉर्म में है जो आपको ग्रीन कॉफी की बिल्कुल सही मात्रा सुनिश्चित करता है।
हालाँकि ग्रीन कॉफ़ी के रिज़ल्ट काफ़ी प्रॉमिसिंग हैं फिर भी, व्यक्तिगत अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं। यदि आपको कोई चिंता या अंतर्निहित हेल्थ कंडिशन हैं तो उन्हें पता करके उसके अनुरूप इलाज व स्वास्थ्य देखभाल ज़रूरी है। क्योंकि वेट-गेन के कई कारण हो सकते हैं और इसीलिए हर किसी के उपर एक उपाय नहीं चलता।
तो आप भी ग्रीन कॉफ़ी के इन बेशुमार गुणों का लाभ आप ज़रूर लें। ग्रीन कॉफी के साथ वजन घटाने की आपकी यात्रा में मेरी शुभकामनाएँ!
Written by: Dr Rajesh Singh
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